Wednesday, September 10, 2014

समय

जीवन के कुछ लम्हों को
मैंने रोकना चाहा था
पर मुट्ठी में रेत को
क्या कोई पकड़ पाया है ?

जब समय हाथ से निकल गया
तब सिर्फ कुछ यादें बची थी
उन लम्हों की मस्तिष्क में
बस एक छाप रह गयी थी

ये यादें ही तो समय है
जो निरंतर बहता रहता है
मैंने उस बहते समय से
बस एक गगरी भर रखली हैं।

Monday, March 17, 2014

एक चाय का प्याला..

एक प्याला चाय का
अपने में कितनी यादें समेटे है
कितने चेहरे , कितनी बातें
हँसी ठिठोली, रूठना मनाना
ख़ुशी और गम के आँसू
सब एक चाय के प्याले में ही मैंने संजोये हैं ।

सुबह की पहली किरन में
पापा से यूँ ही गपियाना
मम्मी से लड़ के भाग जाना
भाई को सोते से जगाना
और आलस को दूर भगाना
सब एक चाय के प्याले से

कॉलेज में बंक मारके
टपरी पे वक़्त बिताना
या शाम को दोस्तों के साथ
दुनिया जहाँ की बाते करना
अपने सारे गम सुनाना
और उनको मुफ्त की सलाह देना
सब एक चाय के प्याले से

एक दोस्त जो दिल के करीब
उससे बैठ के चर्चा करना
जीवन के सिद्धांतो पे
अपनी धारणाओं की व्याख्या करना
लड़ना चिल्लाना , फिर एक दूजे को मनाना
सब एक चाय के प्याले से

शाम ढले घर को जाना
बैठ के कुछ बाते करना
पूरे दिन के किस्से कहानियाँ
कुछ हँसी और कुछ आँसू बाँटना
किसी के दिल के करीब आना
और उसमे अपना जहाँ पाना
सब एक चाय के प्याले से

कितना विचित्र है ये प्याला
दिन बदले समय यूँ बीता
लोग आए , कुछ रह गए और
कुछ चले गए
कुछ अच्छी, कुछ बुरी यादें
कुछ प्यार भरी मीठी तकरारे
कभी दिल का जुड़ना और कभी टूटना
कभी भविष्य के सपने संजोना
कुछ कविता कुछ गीत सुनना
कुछ सोच, एकदम से हँसना
दोस्तों की महफ़िल
गप्पे हाँकना
सब एक चाय के प्याले से

जीवन तो चलता ही रहता
पर जब भी एक प्याला चाय है आता
वक़्त बस थोडा थम जाता
एक नया गीत बन जाता
और अपनों को करीब ले आता
भूली बिसरी यादों पर से
वक़्त की जमी धूल हटाता
ये एक चाय का प्याला। 

Friday, December 27, 2013

Introspection

I need a break..
A break to relive, what is forgotten
A break to cherish, what is left behind
A break to celebrate, what lost the priority
A break to sing, the songs inside the heart
A break to love, people who deserves it
A break to tell, feelings untold
A break to vent, all my anger out
A break to fly, high in the sky
A break to visit, places unseen
A break to be, with people who matters most
A break to live, a life I want
And a break to meet, my usual self....

Thursday, November 14, 2013

अधूरी बातें... (1)

Recently I found my long lost diary in which I have compiled most of my poems during college days. It feels so good to find it and read it. It contains 15 poems in all, written mostly during 2009.

So happy to post them in my blog. Will try to post one poem a week (as time permits). The series is titled "अधूरी बातें". Hope you like it.

निकल पड़ी मैं ऐसी राहों पर
जिनकी कोई मंजिल ही नहीं
खो गयी मैं उस जहाँ में
जिसमें मेरा कोई अपना ही नहीं

 चाहा तो था कि तुम मेरे होते
माँगा तो था तुम्हे हर दुआ में
पर पता ना था मुझे इस जहाँ में
सिर्फ सपनों के बसेरे होते

तुम एक सपना ही तो थे
जिसे मैंने पाने की हसरत कर डाली
भूल से मैंने तुमसे
मोहब्बत करने की जुर्रत कर डाली

पर क्या करूँ ???
इस दिल को आज भी तुम्हारा इंतज़ार हैं
इस जीवन में बस अब एक
तुम्हें ही पाने की चाह हैं । 

Wednesday, October 16, 2013

Happy Birthday Maa

This poem is dedicated to my mother.

Actually I didn't want to write a sad poem but was not able to control myself (I guess :P). Hope you enjoy this. :)

मैं बैठी हूँ खिड़की के पास
और पलट रही कुछ पन्नों को
जहाँ पहुँच गई मैं बचपन में
यानि कि गंगा के तट पे ।

जब भी सोचूँ बचपन को
तो बस तू ही याद आती हैं माँ
गंगा के जल की कलकल में
बस गूंजती तेरी हँसी माँ ।

जब मैं सड़क पे गिरती थी
और रोते तुझसे लिपट जाती
कुछ आँसू की बूंदे तो
मेरे ऊपर भी गिरती थी ।

वो स्कूल से भागते हुए आना
और तेरे हाथ का खाना खाना
वो स्वाद और मिठास, दोनों हीं
क्यों अब नहीं मिल पाती माँ ।

जब भी कोई चिंता होती
मैं तुझसे पूँछ तो लेती थी
आज फिर किसी आपत्ति में
तू क्यों पास नहीं है माँ ।

याद है मुझे आज भी
जब मैं किसी से लड़ती थी
तुम मेरी ही तो फिक्र में
कितना घबरा जाती थी माँ ।

आज नहीं कोई डाँटने वाला
ना कोई गलती की गुंजाइश है
वो बचपन भले ना लौटे अब
पर तू यहीं आ जा ना माँ ।

मुझे खुश देखना बस
यहीं एक सपना तो हैं तेरा
फिर तुझसे दूर रहके मैं
कैसे खुश हूँ , तू ही बता ?

Wednesday, October 9, 2013

विचारों का पुनार्गमन

कुछ  मंजिले दूर सही ,
कुछ चाहते अधूरी ही सही ,
कुछ सपने बस आँखों में रहे 
दिल के अरमान दिल में ही सही

ये दुनिया कभी मेरी थी ही नहीं ,
चाहत तो केवल एक हँसी की थी 
उसकी खोज में हम अब भी है 
जीवन एक संघर्ष आज भी तो है । 

बस होठों की मुस्कान दिल से नहीं 
लबों की हँसी में भी वो बात नहीं 
लेकिन जीना है बस इसी के लिए 
हाँ , ये अरमान आज भी वही ..

Wednesday, September 25, 2013

Waiting for the diary!!

Hey hello to all,

Well when I was in college, I used to write many poems (mostly in Hindi). We have time then. Lots of free time. :)

I have them documented in a diary and it is not with me. I am waiting for it. Therefore, stay tuned for more hindi poems.



Thanks....